रांची के चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा पंडाल का इतिहास: पहले और अब में कितना बदला स्वरूप?…………………….
रिपोर्ट : रांची डेस्क………….
रांची : रांची के मेन रोड स्थित चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति का इतिहास वर्ष 1979 से जुड़ा है। शुरुआत में जहां पूजा का आयोजन सीमित संसाधनों और पारंपरिक सजावट के बीच होता था, वहीं आज यह पंडाल अपनी भव्यता, विशाल प्रतिमाओं और हर साल नई थीम के कारण आकर्षण का केंद्र बनता है। 1979 से यहां पर सरस्वती पूजा से शुरुआत हुई और बहुत ही प्रेम और श्रद्धा से पूजा शुरू कि गई । यहां पर दुर्गा पूजा होना चाहिए इसका मुख्य कारण उस समय बकरी बाजार को छोड़कर बड़ा पूजा नहीं होता था तो हमलोगों ने दुर्गा पूजा का शुभारंभ किया और पहले पूजा 1979 में 23000 में हमने शुरू किया और आज वह पूजा एक करोड़ पहुंच गया यह माता की कृपा है रांची के भक्त और यहां के लोगों का सहयोग करने का प्रयास हैं समय के साथ पंडाल का स्वरूप बदलता गया। पारंपरिक पूजा से आगे बढ़कर अब हर साल अलग-अलग मंदिरों और ऐतिहासिक स्थापत्य की झलक देखने को मिलती है। आधुनिक लाइटिंग, आकर्षक कलाकारी और तकनीक ने पंडाल की सुंदरता को नया आयाम दिया है। इस बदलाव की एक बड़ी मिसाल वर्ष 2026 का आयोजन है, जिसमें द्वारकाधीश मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। करीब 80 लाख रुपये के अनुमानित निर्माण बजट वाला यह पंडाल श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ स्थापत्य कला का अनुभव भी देगा। 1979 से 2026 तक का यह सफर बताता है कि पंडाल का बाहरी स्वरूप भले बदल गया हो, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और सामूहिक आयोजन की परंपरा आज भी इसकी पहचान है।
1971 से 2026 तक का यह सफर बताता है कि पंडाल का बाहरी स्वरूप भले बदल गया हो, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और सामूहिक आयोजन की परंपरा आज भी इसकी पहचान है।
2026 में समिति गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार कर रही है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार इसकी प्रस्तावित ऊंचाई लगभग 120 फीट, चौड़ाई 95 फीट और लंबाई 140 फीट है। निर्माण में करीब 80 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। पंडाल में भगवान कृष्ण से जुड़ी झांकियां, आधुनिक लाइटिंग और 3D इफेक्ट भी आकर्षण होंगे।
