झारखंड की IAS अधिकारी पूजा सिंघल (Pooja Singhal) के मनरेगा/मनी लॉन्ड्रिंग केस …………………
रिपोर्टर:- रांची डेस्क
रांची : ED के अनुसार, खूंटी में 2009–2010/11 के दौरान विकास कार्यों के लिए लगभग ₹24 करोड़ जारी हुए, जिनमें से करीब ₹18.06 करोड़ के गबन/अनियमितता का आरोप जांच में सामने आया। उस समय पूजा सिंघल खूंटी की Deputy Commissioner थीं। ED का आरोप है कि सरकारी योजनाओं की राशि स्वीकृत कराने के बदले कमीशन लिया गया और कथित अवैध धन को बाद में अलग-अलग माध्यमों से निवेश किया गया। ये ED के आरोप/जांच के निष्कर्ष हैं, अंतिम न्यायिक फैसला नहीं। 6 मई 2022 को ED ने कई स्थानों पर छापेमारी की। ED के अनुसार विभिन्न परिसरों से कुल लगभग ₹19.76 करोड़ नकद, वाहन और दस्तावेज/डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। झारखंड हाई कोर्ट ने भी दिसंबर 2025 में cognizance order को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि prosecution sanction का मुद्दा मुकदमे के दौरान भी निर्धारित किया जा सकता है। मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है। 30 मार्च 2026 को ED ने चौथी supplementary prosecution complaint दाखिल की, जिसमें पांच नए आरोपियों को जोड़ा गया और ₹1.33 करोड़ की कथित proceeds of crime से खरीदी गई 17 decimal जमीन को confiscate करने की मांग की गई। 25–26 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पूजा सिंघल की उस याचिका में राहत देने से इनकार किया जिसमें वह अपने खिलाफ PMLA मामले में trial-court के cognizance order को चुनौती दे रही थीं। इसका मतलब है कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी।
अभी इन आरोपों को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता; अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
