सानबासा गांव के लोगों का फूटा गुस्सा आजादी के 78 साल बाद भी नहीं मिली मूलभूत सुविधाएं
रिपोर्ट:रांची डेस्क
ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन, सरकार और प्रशासन से लगाई गुहार
(जमशेदपुर) पोटका प्रखंड के रसूनचोपा पंचायत अंतर्गत आने वाला सानबासा गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। गांव के लोगों ने मंगलवार को मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 साल बाद भी उन्हें न तो सड़क, न स्वास्थ्य सुविधा और न ही स्वच्छ पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं मिली हैं।
गांव में 48 परिवार, 375 लोग – लेकिन सुविधाएं शून्य
सानबासा गांव में कुल 48 परिवारों के लगभग 375 लोग निवास करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक गांव की दशा नहीं बदली।
गांव में एकमात्र चापाकल है, जिसके भरोसे पूरा गांव पीने का पानी प्राप्त करता है। लेकिन जब वह खराब हो जाता है तो लोगों को कुएं का सहारा लेना पड़ता है। इससे गांव में जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
एंबुलेंस नहीं पहुंचती, गर्भवती महिलाओं को खटिया पर ढोना पड़ता है
ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक सड़क की हालत इतनी खराब है कि एंबुलेंस या वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। मजबूरन मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है।
ग्रामीणों की मांगें
1. गांव तक दो किलोमीटर जर्जर सड़क की तत्काल मरम्मत की जाए।
2. जलमिनार की मरम्मती और नए चापाकलों की स्थापना की जाए।
3. गांव में प्राथमिक विद्यालय और स्वास्थ्य उपकेंद्र की व्यवस्था हो।
4. हर घर तक बिजली और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस के जिला सचिव जयराम हांसदा का बयान
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस के जिला सचिव जयराम हांसदा ने कहा यह शर्मनाक है कि आजादी के 78 साल बाद भी सानबासा जैसे गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए। ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज करना प्रशासन की विफलता है
सरकार से ग्रामीणों की गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार मांग पत्र सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस कारण ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रदर्शन कर सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय प्रशासन के लिए यह गांव विकास की सच्ची परीक्षा बन चुका है।अगर शीघ्र ही आवश्यक सुविधाएं नहीं पहुंचाई गईं, तो ग्रामीणों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।
