झारखंड में सड़कों-बस्तियों के नामकरण पर नए नियम, अपराधियों और जीवित व्यक्तियों के नाम पर लगेगी रोक
झारखंड नगरपालिका नियमावली-2026 लागू, स्वतंत्रता सेनानियों, महापुरुषों और स्थानीय ऐतिहासिक हस्तियों को मिलेगी प्राथमिकता; 30 दिन में सर्वे, 60 दिन में अपडेट होंगे रिकॉर्ड
जमशेदपुर: झारखंड नगरपालिका नियमावली-2026 के तहत अब राज्य के शहरी क्षेत्रों में सड़कों और बस्तियों के नामकरण को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार किसी भी आपराधिक छवि वाले व्यक्ति या जीवित व्यक्ति के नाम पर सड़क, गली, चौक या बस्ती का नाम नहीं रखा जा सकेगा।
जेएनएसी के नगर आयुक्त योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि नई नियमावली के तहत केवल स्वतंत्रता सेनानियों, महापुरुषों तथा स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हस्तियों के नामों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि शहरों की पहचान समाज के प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों से जुड़ सके।
नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अगले 30 दिनों के भीतर विशेष सर्वे दल का गठन किया जाएगा। यह टीम शहर की सड़कों और बस्तियों की मैपिंग करेगी तथा ऐसे नामों की पहचान करेगी जो जातिसूचक, सांप्रदायिक या अपमानजनक माने जाते हैं। ऐसे नामों को हटाकर नए नाम प्रस्तावित किए जाएंगे।
इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी), मानगो नगर निगम और जुगसलाई नगर परिषद ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
तीन भाषाओं में लगेंगे साइनबोर्ड
नगर आयुक्त ने बताया कि नए नियमों के तहत शहर के प्रवेश द्वारों और अन्य प्रमुख स्थानों पर हिंदी, अंग्रेजी या क्षेत्रीय भाषा में साइनबोर्ड लगाए जाएंगे। नए नामों को मंजूरी मिलने के 60 दिनों के भीतर संबंधित निवासियों के यूनिक प्रिमिसिस नंबर (UPN) बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपडेट किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वीकृत साइनबोर्ड को नुकसान पहुंचाने, गंदा करने या किसी भी प्रकार से अवैध नाम लिखने या लगाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी।
प्रमुख बातें:
आपराधिक छवि वाले और जीवित व्यक्तियों के नाम पर नहीं होंगे सड़क और बस्ती के नाम।
स्वतंत्रता सेनानियों, महापुरुषों और स्थानीय ऐतिहासिक हस्तियों को मिलेगी प्राथमिकता।
30 दिनों में विशेष सर्वे टीम करेगी मैपिंग।
जातिसूचक, सांप्रदायिक और अपमानजनक नामों में होगा बदलाव।
हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा में लगाए जाएंगे नए साइनबोर्ड।
60 दिनों के भीतर मुफ्त में अपडेट होंगे यूनिक प्रिमिसिस नंबर (UPN)।
नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी।
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