2.20 करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार, 150 से अधिक मामलों में था वांछित; NIA भी कर रही थी तलाश
रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। उसके साथ दो अन्य सहयोगियों को भी हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल था।
धनबाद-गिरिडीह सीमा से हुई गिरफ्तारी
पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने दो सहयोगियों के साथ गिरिडीह की ओर जाने वाला है। इसके बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर ने संयुक्त रणनीति बनाकर धनबाद-गिरिडीह सीमा स्थित मनियाडीह क्षेत्र में अभियान चलाया।
कार्रवाई के दौरान टाटा मैजिक वाहन से यात्रा कर रहे मिसिर बेसरा, उसके सहयोगी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने इस दौरान दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
करीब चार दशक से था माओवादी संगठन में सक्रिय
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ क्षेत्र का रहने वाला मिसिर बेसरा लगभग 40 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। बताया जाता है कि धनबाद में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान वह महाजनी विरोधी आंदोलन के जरिए नक्सली गतिविधियों से जुड़ा और बाद में संगठन का शीर्ष नेता बन गया।
देश में बचा था अंतिम सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल के वर्षों में माओवादी संगठन को लगातार बड़े झटके लगे हैं। फरवरी 2026 में संगठन के शीर्ष नेता देव के आत्मसमर्पण और उससे पहले मई 2025 में बसवा राजू के मारे जाने के बाद मिसिर बेसरा संगठन का एक प्रमुख सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य माना जा रहा था।
IB की निगरानी और संयुक्त ऑपरेशन से मिली सफलता
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी (Intelligence Bureau) काफी समय से मिसिर बेसरा की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। इसी इनपुट के आधार पर राज्य पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
कई महीनों से दे रहा था सुरक्षा बलों को चकमा
मिसिर बेसरा पिछले कई महीनों से लगातार अपना ठिकाना बदलकर सुरक्षा बलों से बच रहा था। हालांकि हाल के महीनों में उसके दस्ते के कई माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके थे। जांच एजेंसियों को इन आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से भी उसकी गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं।
2007 में पहली बार हुआ था गिरफ्तार
मिसिर बेसरा को पहली बार सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर हुए माओवादी हमले के दौरान वह फरार हो गया था। इसके बाद उसने बूढ़ापहाड़, कोल्हान और सारंडा के जंगलों में लंबे समय तक अपनी गतिविधियां जारी रखीं।
150 से अधिक मामले, NIA को भी थी तलाश
पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से दो मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी उसकी तलाश कर रही थी।
झारखंड सरकार ने उस पर ₹1 करोड़ और ओडिशा सरकार ने ₹1.20 करोड़ का इनाम घोषित किया था। इस तरह उस पर कुल ₹2.20 करोड़ का इनाम था।
रांची ले जाया गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस मिसिर बेसरा और उसके दोनों सहयोगियों को पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए रांची लेकर रवाना हो गई। सुरक्षा एजेंसियां अब उससे संगठन के नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति और अन्य सक्रिय माओवादी कैडरों के संबंध में पूछताछ करेंगी।
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