3 साल पूरे होने से पहले 56 लिपिकों का तबादला, पलामू प्रमंडल में मचा बवाल; नियमों की अनदेखी का आरोप
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3 साल पूरे होने से पहले 56 लिपिकों का तबादला, पलामू प्रमंडल में मचा बवाल; नियमों की अनदेखी का आरोप

लिपिकों ने स्थानांतरण आदेश को बताया मनमाना, वरिष्ठता, ग्रेड पे और शिक्षा निदेशक के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का लगाया आरोप; आदेश निरस्त करने की मांग

गढ़वा: पलामू प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक द्वारा 56 उच्च वर्गीय एवं निम्न वर्गीय लिपिकों के एकमुश्त स्थानांतरण आदेश के बाद शिक्षा विभाग में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानांतरित लिपिकों ने इस आदेश को विभागीय नियमों के विपरीत बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों, वरिष्ठता और स्वीकृत पदों की अनदेखी की गई है।

लिपिकों का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पत्रांक-2093, दिनांक 12 जून 2026 में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि केवल उन्हीं लिपिकों का स्थानांतरण किया जाए, जिन्होंने किसी कार्यालय में लगातार तीन वर्ष या उससे अधिक समय तक कार्य किया हो। जबकि पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले के कुल 56 लिपिकों का एक साथ तबादला कर दिया गया, जिनमें अधिकांश का तीन वर्ष का कार्यकाल अभी पूरा ही नहीं हुआ था।

उन्होंने बताया कि उनका पिछला स्थानांतरण आदेश 25 जनवरी 2024 को जारी हुआ था और उन्होंने फरवरी 2024 में नए पदस्थापन स्थल पर योगदान दिया था। ऐसे में उनका तीन वर्षीय कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था। इसके बावजूद समय से पहले स्थानांतरण कर दिए जाने को उन्होंने विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन बताया है।

अन्य दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप

लिपिकों का आरोप है कि स्थानांतरण के दौरान शिक्षा निदेशक के पत्र की अन्य महत्वपूर्ण कंडिकाओं की भी अनदेखी की गई। उनके अनुसार, यदि कोई लिपिक पिछले 12 वर्षों में किसी एक जिले में आठ वर्ष तक कार्यरत रहा हो, तो उसे दूसरे जिले में स्थानांतरित करने का प्रावधान है। वहीं लगातार छह वर्ष तक एक ही जिले में पदस्थापित कर्मियों को भी दूसरे जिले में भेजा जाना चाहिए। इसके बावजूद कई ऐसे कर्मियों का स्थानांतरण नहीं किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका

स्थानांतरित लिपिकों का कहना है कि प्रमंडल के तीनों जिलों में एक साथ बड़ी संख्या में लिपिकों का तबादला होने से शिक्षा विभाग के नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। विद्यालयों से जुड़े स्थापना कार्य, शिक्षकों का वेतन, पेंशन, सेवा पुस्तिका, कार्यालयीन पत्राचार और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने विभाग से आदेश पर पुनर्विचार कर इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

वरिष्ठता और ग्रेड पे की अनदेखी का आरोप

उच्च वर्गीय लिपिकों ने आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में वरिष्ठता और स्वीकृत पदों का भी पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में उच्च वर्गीय लिपिकों को क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी कार्यालयों में भेज दिया गया, जबकि 1900 और 2000 ग्रेड पे वाले कई निम्न वर्गीय लिपिकों को ऐसे कार्यालयों में पदस्थापित कर दिया गया, जहां नियमानुसार 2200, 2400, 2800, 4200 और 4600 ग्रेड पे वाले उच्च वर्गीय लिपिकों के पद स्वीकृत हैं।

वेतन भुगतान पर भी संकट की आशंका

लिपिकों का कहना है कि स्वीकृत ग्रेड पे के अनुरूप पदस्थापन नहीं होने से भविष्य में वेतन भुगतान और वित्तीय स्वीकृति से संबंधित तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उनका मानना है कि यदि आदेश में संशोधन नहीं किया गया, तो विभाग को प्रशासनिक और वित्तीय दोनों स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

इस संबंध में प्रदीप कुमार सिंह, ओम प्रकाश सिंह, इम्तियाज अली सहित अन्य लिपिकों ने क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक से स्थानांतरण आदेश को तत्काल निरस्त कर विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नई सूची जारी करने की मांग की है। दूसरी ओर, इस मामले में विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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